કાવ્ય સુર

મારી અને નવોદીતોની રચનાઓ અને વ્યક્તીવીશેશ

Archive for June 20th, 2007

एक फुलकी खुश्बु है - ऋचा जानी

Posted by સુરેશ on June 20, 2007

एक फुलकी खुश्बु है, गमभरी कहानी है।
न लीखी ये कीताबोमें, कीसी दीलकी जुबानी है ।

शाम होते सताती है, तेरी याद धुंआ बनके,
आंसुसे हुइ जो गीली तेरी याद जलानी है।

जग रंग बदलता है, कौन अपना पराया है,
अपनोंके हाथों पर मेरे खुनकी नीशानी है ।

न तो पुरा उजाला है, न तो पुरा अंधेरा है,
शायद है वो ही तो, वजह ये शाम सुहानी है ।

आसमां पर बीठाती है, तो कभी गमके अंधेरेमें,
अच्छा कीया कुदरतने, दो दीनकी जवानी है ।

हुइ क्या है खता मेरी कि, तुम इतने रुठ गये,
आज पुछती है राज तुम्हें, ये बात बतानी है।

घनघोर अंधेरा है, कोइ राह नहीं दीखती,
कल होगा सवेरा, फिर ये आस टीकानी है !

ऋचा जानी

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આજનું ચાંદરણું - રતીલાલ ‘અનીલ’

Posted by સુરેશ on June 20, 2007

સુર્ય ઇતીહાસ થશે ત્યારે 

વાંચનારું કોઇ નહીં હોય.

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20 - જુન - વ્યક્તીવીશેષ

Posted by સુરેશ on June 20, 2007

મહેન્દ્ર મેઘાણી  નો જન્મદીન -  1923; મુંબાઇ

  •  અંગ્રેજ લેખક ચાર્લ્સ ડિકન્સની ‘પિક્વિક પેપર્સ’ નામની નવલકથાએ પ્રજાનું એટલું કલ્યાણ કર્યું છે,
    જેટલું ધર્મગ્રંથ ‘બાઇબલે’ પણ નથી કર્યું.” 
  • જીવનઝાંખી

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