કાવ્ય સુર

મારી અને નવોદીતોની રચનાઓ અને વ્યક્તીવીશેશ

Archive for September 24th, 2007

क्या यही मेरा जीवन ? - राजेन्द्र त्रीवेदी

Posted by સુરેશ on September 24, 2007

सुबहसे श्याम, श्याम से रात,
और रातसे फीर सुबह तक?

पानीके फंवारेसे भीगके, युं भागे पेट भरने ।
बीवीको बाय करके, सबवे मेँ ओफीस जाने ।

साहीबकी करते सेवा,  डोलर बहुत बनाने ।
फास्ट फुड अकेले खाके, शाम होते घरको आने।

बीवीसे बोलनेका, टाइम भी तो कम है,
सोनेके साथ सुबहाकी, बस आस अब नहीं है ।

अब प्यारकी ही  प्यासमें,  यह साँस भी तो कम है।
ये होठ भी सुखे हैं , सब बात रहती मनमें ।

क्या बस यही है जीवन, जीने का एक मकसद ?
या कुछ करके मन रिझाने ,  सब साथ प्यार बाँटे ? 

राजेन्द्र त्रीवेदी

जनाब! अब तो आप उर्दु शायर भी हो चुके !

Posted in ગીત, રાજેન્દ્ર ત્રીવેદી | 1 Comment »